Summary
1984 में, जब हीरो होंडा को एक ऐसे समाधान की आवश्यकता थी जिसे 'भारत में नहीं बनाया जा सकता था', तब दशमेश इंजीनियरिंग के पंजाब इंजीनियर प्रीतम सिंह मोगेवाला ने इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने बी.के. जैन के साथ मिलकर स्वदेशी इंजीनियरिंग को बढ़ावा दिया, यह साबित करते हुए कि उन्नत औद्योगिक घटक भारत में भी बनाए जा सकते हैं।