Summary
भारतीय टेस्ट टीम में पहली बार चुने गए सारांश जैन की कहानी संघर्ष और भावनाओं से भरी है, जहां उनके कैंसर से जूझ रहे पिता के लिखे शब्द 12 साल बाद सच हो गए। उनके पिता ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान एक पर्ची पर लिखा था कि बेटा, तू जितना अच्छा करेगा, मैं उतनी जल्दी ठीक हो जाऊंगा।