Summary
निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन 19 साल बाद कोलकाता लौटीं और इसे 'घर वापसी' बताया। वह 1 अगस्त को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और लेखक शीर्षेंदु मुखोपाध्याय के साथ एक कार्यक्रम में शामिल होंगी। उन्हें 1993 में अपने उपन्यास 'लज्जा' के कारण बांग्लादेश से निर्वासित किया गया था और 2007 में विरोध प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ना पड़ा था।