Summary
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से डिजिटल अरेस्ट को आपराधिक कानून में एक अलग अपराध के रूप में परिभाषित करने और इसके लिए कठोर सजा का प्रावधान करने पर विचार करने को कहा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट से निपटने के लिए एक कानून पर काम कर रही है।